नवरात्रि की महाअष्टमी पर चौबीस खंबा माता मंदिर में चढ़ा मदिरा का भोग, बच्चों एवं महिलाओं ने भी लिया प्रसाद, राजा विक्रमादित्य कालीन है नगर पूजन परंपरा

उज्जैन। न्याय प्रिय सम्राट विक्रमादित्य के काल से चली आ रही परंपरा का हजारों वर्ष बाद भी धर्म नगरी उज्जयिनी में निर्वाहन होता है। नवरात्रि की महाष्टमी पर 24 खंबा माता मंदिर पर मां महामाया एवं मां महामाया को नगर के राजा स्वरूप में जिलाधीश आशीष सिंह ने मदिरा का भोग अर्पण किया। ढोल नगाड़ों व जयकारों के बीच जैसे ही भोग अर्पण हुआ इसके बाद 27 किमी लंबी नगर पूजन यात्रा शुरू हुई, जिसके पूरे मार्ग में मदिरा की धारा बहती रही। देश एवं प्रजा की सुख समृद्धि की कामना के लिए शासकीय तौर पर हर वर्ष यह पूजन कराया जाता है।उज्जैन के मंदिर एवं प्राचीन परंपराएं अपने आप में चमत्कारिक एवं अनूठी है। महाष्टमी पर नगर पूजन दौरान माताजी को मदिरा का जो मदिरा का भोग लगा उसे यहां भक्त स्वरूप मौजूद महिलाओं व बच्चों ने भी आंशिक रूप में ग्रहण किया। मान्यता है कि इस प्रसाद से रोग शोक, दुख-कष्टों का निवारण होता है एवं घर परिवार में समृद्धि व खुशहाली आती है। कलेक्टर आशीष सिंह ने नगर पूजा विधि कराई और यात्रा को आरंभ किया। यह यात्रा नगर के विभिन्न देवालयों में पहुंचेगी जहां पूजन व श्रृंगार सामग्री अर्पित होगी। इसके उपरांत अंकपात मार्ग स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर पर इसका विधिवत समापन होगा।

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